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जेपी हॉस्पिटल ने बनाया रिकार्ड, केवल 20 महीने में 100 सफल किडनी ट्रांसप्लांट

नोएडा : दिल्ली-एन.सी.आर. में अग्रणी एवं उत्तर भारत में प्रमुख स्थान रखने वाले, नोएडा स्थित मल्टी सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा संस्थान जेपी हॉस्पिटल ने प्रत्यारोपण चिकित्सा में एक गौरवपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जेपी हॉस्पिटल का शुभारंभ साल 2014 में हुआ था, हॉस्पिटल में ट्रांसप्लांट की शुरुआत साल 2015 के मई महीने में की गई थी और सिर्फ 20 महीने के अंदर ही जेपी हॉस्पिटल ने 100 सफल किडनी प्रत्यारोपण कर नई उपलब्धि हासिल की है। सबसे खास बात यह है कि पूरे दिल्ली-एन.सी.आर. में जेपी हॉस्पिटल में अंगों का प्रत्यारोपण बहुत ही उचित कीमत पर किया जाता है।

अपनी उपलब्धि पर पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए जेपी हॉस्पिटल के यूरोलॉजी एवं किडनी ट्रांसप्लांट विभाग के सीनियर कंसल्टेंट एवं कोर्डिनेटर डॉ. अमित देवड़ा ने कहा कि भारत में हर साल करीब 20,000 लोगों की किडनी खराब होती है जिनमें से करीब 5,000 मरीजों को नई जिंदगी प्रदान की जाती है क्योंकि लोगों के बीच किडनी दान करने को लेकर जागरूकता की कमी है। जब किडनी की कार्यक्षमता केवल 10 प्रतिशत रह जाती है तो उस अवस्था को किडनी फैल्योर कहते हैं और ऐसे में मरीजों के पास सिर्फ डायलिसिस या प्रत्यारोपण का ही रास्ता बच जाता है।

वरिष्ठ किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. देवड़ा ने मरीजों को बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी दी कि दिल्ली-एन.सी.आर. के मरीजों को अब किडनी प्रत्यारोपण के लिए अधिक परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि जेपी हॉस्पिटल में किडनी प्रत्यारोपण बहुत की अत्याधुनिक पद्धति से किया जा रहा है। इस पद्धति द्वारा दाता की किडनी को दूरबीन द्वारा शरीर से हटाया जाता है, जिसका सबसे अधिक लाभ यह होता है कि दाता को बहुत ही कम तकलीफ होती है और उसे हॉस्पिटल से जल्द छुट्टी मिल जाती है। इसके साथ ही यहां डोनर विथ मल्टीपल वैसल्स (किडनी में अधिक नसों का होना), बच्चों की किडनी का प्रत्यारोपण, अनमैच्ड ब्लड ग्रुप के बीच प्रत्यारोपण एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता में असंतुलन वाले मरीजों की किडनी का भी सफल प्रत्यारोपण किया गया है।

जेपी हॉस्पिटल के नेफ्रोलॉजी एवं किडनी प्रत्यारोपण विभाग के सीनियर कंसलटेंट डॉ. अनिल प्रसाद भट्ट के अनुसार, “कुछ ही महीनों में 100 से अधिक किडनी का प्रत्यारोपण अपने आप में एक अनोखा रिकार्ड है। जेपी हॉस्पिटल में स्थापित अत्याधुनिक तकनीक और कुशल डॉक्टर्स की टीम के कारण यह उपलब्धि हासिल हुई है। खास बात यह है कि टीम ने क्रांस मैच्ड पॉजीटिव प्रत्यारोपण, “ए.बी.ओ. इंकंपैटिबल ट्रांसप्लांटेशन” के साथ-साथ एक रोगी का दूसरी या तीसरी बार भी सफल प्रत्यारोपण किया है। इससे भी अहम बात यह है कि दिल्ली-एन.सी.आर. सहित उत्तर भारत में किडनी प्रत्यारोपण करने वाले जितने भी हॉस्पिटल है जेपी हॉस्पिटल उन सभी स्वास्थ्य संस्थान की तुलना में कम कीमत पर लोगों की जिंदगी बचा रहा है।”

जेपी हॉस्पिटल के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. विजय कुमार सिन्हा ने भी क्रोनिक किडनी फैल्योर के बारे में बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की, “वर्तमान का चिकित्सकीय अध्ययन यह बताता है कि किडनी को बीमार बनाने के कारणों में मधुमेह, रक्तचाप, नेफ्रीटाइस, पेन किलर दवाइयां और स्टोन हैं। जब किडनी की बीमारी लाईलाज अवस्था में पहुंचे तो मरीज को प्रत्यारोपण करा लेना चाहिए क्योंकि इससे जीवन भर डायलिसिस कराने से मरीज को मुक्ति मिल जाती है। इसके साथ ही मरीज को इससे कई और लाभ भी मिलते हैं। आर्थिक रूप से मरीज को राहत मिलती है क्योंकि जितनी राशि एक साल डायलिसिस कराने में मरीज खर्च करते हैं, करीब उतने पैसे में पूरा ट्रांसप्लांट हो जाता है। प्रत्यारोपण के बाद मरीज एक स्वस्थ व्यक्ति की तरह अपनी दिनचर्या पूरी कर सकता है। बच्चों के मामले में यह और भी अधिक लाभकारी है क्योंकि प्रत्योरण के बाद बच्चों के शरीर का विकास सही तरीके से होता है।”

किडनी प्रत्यारोपण चिकित्सका में 100% सफलता पाने के गौरवपूर्ण रिकार्ड पर जेपी हॉस्पिटल के सी.ई.ओ. डॉ. मनोज लूथरा ने किडनी विभाग के सभी चिकित्सकों को बधाई दी और कहा, “सैकड़ों रोगियों को एक नई जिंदगी प्रदान करने वाला यह एक महान कार्य है जिसके लिए किडनी विभाग के सभी चिकित्सक बधाई के पात्र हैं। सबसे अच्छी बात तो यह है कि जेपी हॉस्पिटल ने किडनी प्रत्यारोपण चिकित्सका में 100% सफलता का इतिहास बनाया है। यहां के चिकित्सकों के विशाल अनुभव के कारण ही जेपी हॉस्पिटल को यह सफलता हासिल हो पाई।”

उन्होंने यह भी कहा कि इस हॉस्पिटल की उच्चस्तरीय चिकित्सकीय सुविधाओं एवं तकनीकों के प्रति लोगों के अटूट विश्वास का ही परिणाम है कि सिर्फ 2 वर्षों में इस हॉस्पिटल में 2 लाख से अधिक रोगी अपना इलाज कराने आ चुके हैं। हमें आशा है कि आने वाले समय में हम अन्य क्षेत्रों में ऐसी ही महान उपलब्धि हासिल करेंगे।

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